BPH क्या है?
बिनाइन प्रोस्टेटिक हाइपरप्लेसिया (BPH) प्रोस्टेट ग्रंथि का एक गैर-कैंसरयुक्त बढ़ाव है। प्रोस्टेट मूत्रमार्ग को घेरता है — इसलिए जैसे-जैसे यह बढ़ता है, मूत्र का प्रवाह बाधित होता है। BPH कैंसर नहीं है और इससे कैंसर का खतरा नहीं बढ़ता, लेकिन अगर इसका इलाज न हो तो मूत्राशय और गुर्दे को नुकसान हो सकता है। 50 वर्ष से अधिक आयु के 50% पुरुष और 80 वर्ष से अधिक के 80% पुरुष इससे प्रभावित होते हैं।
लक्षणों को पहचानें
BPH में दो प्रकार के मूत्र संबंधी लक्षण होते हैं:
- अवरोधक लक्षण: कमज़ोर या रुक-रुककर आने वाली मूत्र धारा, पेशाब शुरू करने में कठिनाई, लंबे समय तक पेशाब, बाद में टपकना, अधूरे खाली होने का एहसास।
- भंडारण लक्षण: हर 1–2 घंटे में पेशाब जाना, अचानक तेज़ इच्छा, रात में 2 या अधिक बार उठकर पेशाब (नॉक्टुरिया), इच्छा न रोक पाना।
आपके लक्षण कितने गंभीर हैं?
IPSS (इंटरनेशनल प्रोस्टेट सिम्प्टम स्कोर) — 7 सवालों का एक सरल स्व-मूल्यांकन — लक्षणों की गंभीरता और उपचार के विकल्प तय करने में मदद करता है:
| IPSS स्कोर | गंभीरता | सामान्य उपाय |
|---|---|---|
| 0–7 | हल्का | निगरानी; जीवनशैली में बदलाव |
| 8–19 | मध्यम | दवाएं |
| 20–35 | गंभीर | न्यूनतम-आक्रमक या शल्य चिकित्सा |
निदान
यूरोलॉजिस्ट आमतौर पर ये जांचें करेंगे:
- यूरोफ्लोमेट्री — मूत्र धारा की गति और पैटर्न मापता है।
- पोस्ट-वॉयड रेसिडुअल अल्ट्रासाउंड — पेशाब के बाद मूत्राशय में बचे मूत्र की जांच।
- PSA रक्त परीक्षण — प्रोस्टेट कैंसर की स्क्रीनिंग के लिए।
- प्रोस्टेट वॉल्यूम अल्ट्रासाउंड — सही दवा या प्रक्रिया चुनने में मदद।
उपचार के विकल्प
- जीवनशैली: शाम को पानी कम पिएं, चाय-कॉफी सीमित करें, दोहरी बार पेशाब करें (double voiding)।
- अल्फा-ब्लॉकर (टैमसुलोसिन, सिलोडोसिन): प्रोस्टेट की मांसपेशियों को ढीला करते हैं; कुछ ही दिनों में राहत।
- 5-अल्फा रिडक्टेस इनहिबिटर (फिनास्टेराइड, डुटास्टेराइड): 3–6 महीनों में प्रोस्टेट को सिकोड़ते हैं; बड़े प्रोस्टेट के लिए।
- संयुक्त चिकित्सा: दोनों दवाएं एक साथ — बड़े प्रोस्टेट और मध्यम-गंभीर लक्षणों के लिए।
- लेज़र प्रोस्टेटेक्टॉमी (HoLEP/GreenLight): एक दिन की प्रक्रिया; रक्तस्राव लगभग शून्य; खून पतला करने वाली दवाओं पर भी संभव।
- TURP: मध्यम से बड़े प्रोस्टेट के लिए स्वर्णमानक सर्जरी।
पेशाब पूरी तरह बंद हो जाए (एक्यूट रिटेंशन), मूत्र में खून आए, बार-बार UTI हो, या रक्त जांच में गुर्दे की कार्यप्रणाली खराब हो रही हो। ये स्थितियां तत्काल उपचार की मांग करती हैं।
एक परामर्श में आपका IPSS स्कोर और सही अगला कदम जान सकते हैं।