पुरुष बांझपन कितना आम है?

बांझपन को नियमित असुरक्षित संभोग के 12 महीने बाद भी गर्भधारण न होने के रूप में परिभाषित किया जाता है। यह विश्व भर में लगभग 15% दंपतियों को प्रभावित करता है। इनमें से लगभग आधे मामलों में पुरुष कारक एकमात्र या आंशिक कारण होता है। इसलिए दोनों साथी की जांच एक साथ कराना ज़रूरी है — इससे मूल्यवान समय बचता है।

सामान्य कारण

पुरुष बांझपन के कारण
  • वेरिकोसेल — अंडकोष की नसें फूल जाती हैं, जिससे तापमान बढ़ता है और शुक्राणु उत्पादन प्रभावित होता है। सुधारने योग्य सबसे आम कारण — 40% बांझ पुरुषों में पाया जाता है।
  • शुक्राणु की कमी या खराबी — कम संख्या (ओलिगोस्पर्मिया), खराब गतिशीलता या असामान्य आकार।
  • अवरोधक अज़ूस्पर्मिया — शुक्राणु बनते हैं पर रास्ते में रुकावट से वीर्य में नहीं आते (संक्रमण, नसबंदी के बाद)।
  • हार्मोनल असंतुलन — FSH, LH या टेस्टोस्टेरोन की कमी; पिट्यूटरी या थायरॉइड की समस्या।
  • आनुवांशिक कारण — क्लाइनफेल्टर सिंड्रोम (XXY), Y-क्रोमोसोम माइक्रोडिलीशन।
  • जीवनशैली — धूम्रपान, अधिक शराब, एनाबोलिक स्टेरॉयड, मोटापा, अत्यधिक गर्मी।
  • पुराना संक्रमण — मम्प्स ऑर्काइटिस, क्लैमाइडिया, गोनोरिया से एपिडिडाइमिस में रुकावट।

कब मदद लें?

35 वर्ष से कम उम्र के दंपति को 12 महीने बाद विशेषज्ञ से मिलना चाहिए। 6 महीने बाद ही मिलें यदि: कोई भी साथी 35 से अधिक हो, वेरिकोसेल, अनडिसेंडेड टेस्टिस या पुराने संक्रमण का इतिहास हो, या किसी का पेल्विक ऑपरेशन हो चुका हो।

कौन सी जांचें होती हैं?

  • वीर्य विश्लेषण (Semen analysis) — मुख्य जांच। शुक्राणुओं की संख्या, गतिशीलता, आकार और वीर्य की मात्रा मापी जाती है। 2–5 दिन के ब्रह्मचर्य के बाद और एक बार दोबारा जांच करें।
  • हार्मोन परीक्षण — FSH, LH, टेस्टोस्टेरोन, प्रोलैक्टिन, थायरॉइड।
  • स्क्रोटल अल्ट्रासाउंड — वेरिकोसेल, टेस्टिस का आकार, रुकावट।
  • आनुवांशिक जांच — गंभीर ओलिगोस्पर्मिया या अज़ूस्पर्मिया में कैरियोटाइप और Y-क्रोमोसोम डिलीशन।
  • टेस्टिकुलर बायोप्सी — यदि अज़ूस्पर्मिया अवरोधक है या उत्पादन की कमी है।

उपचार के विकल्प

  • वेरिकोसेलेक्टॉमी: फूली हुई नसें बांधी जाती हैं। 3–6 महीनों में शुक्राणु की गुणवत्ता में सुधार और गर्भधारण की संभावना बढ़ती है।
  • हार्मोन थेरेपी: हाइपोगोनाडोट्रोपिक हाइपोगोनाडिज्म में FSH/HCG इंजेक्शन शुक्राणु उत्पादन शुरू करते हैं।
  • सर्जिकल शुक्राणु प्राप्ति (TESA/micro-TESE): अज़ूस्पर्मिया में टेस्टिस से सीधे शुक्राणु लेकर ICSI में उपयोग।
  • ART (IUI/IVF-ICSI): हल्के पुरुष कारक में IUI; मध्यम-गंभीर मामलों में ICSI जहां एक शुक्राणु सीधे अंडाणु में इंजेक्ट किया जाता है।
प्रजनन संबंधी चिंता है?

वीर्य विश्लेषण और डॉ. अज़हर अनवर से परामर्श — यह सबसे ज़रूरी पहला कदम है।

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जीवनशैली में बदलाव जो मदद करते हैं

  • धूम्रपान बंद करें — तम्बाकू शुक्राणु के DNA और गतिशीलता को सीधे नुकसान पहुंचाती है।
  • शराब सीमित करें।
  • एनाबोलिक स्टेरॉयड और टेस्टोस्टेरोन सप्लीमेंट से बचें — ये शुक्राणु उत्पादन दबाते हैं।
  • स्वस्थ वजन बनाए रखें — मोटापा अंडकोष का तापमान बढ़ाता है।
  • लैपटॉप को गोद में न रखें; अधिक गर्म पानी में न नहाएं; टाइट अंडरवियर से बचें।
  • जिंक, सेलेनियम, फोलेट, विटामिन C और E से भरपूर संतुलित आहार लें।
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डॉ. अज़हर अनवर M.Ch. यूरोलॉजी (DMC लुधियाना) · DNB जनरल सर्जरी · यूरोलॉजिस्ट एवं एंड्रोलॉजिस्ट, वाराणसी