- धार कमजोर और रात में उठना — आमतौर पर प्रोस्टेट का सामान्य बढ़ना है, कैंसर नहीं।
- ज्यादातर पुरुषों को दवा से आराम मिलता है। ऑपरेशन तब, जब दवा काम न करे या गुर्दों पर असर पड़े।
- PSA जाँच जरूरी है। सिर्फ PSA बढ़ने का मतलब कैंसर नहीं है।
अगर पेशाब बिल्कुल नहीं आ रहा और पेट का निचला हिस्सा फूला और दर्द कर रहा है, तो उसी दिन कैथेटर लगाना पड़ता है। देर करने से मूत्राशय खिंच जाता है और दबाव गुर्दों पर पड़ता है। बुखार के साथ पेशाब में तकलीफ या थक्कों से रास्ता बंद होने पर भी आज ही आएँ।
जाँच क्यों जरूरी है
दो वजहें हैं कि इसे सहते नहीं रहना चाहिए।
- रुकावट चुपचाप गुर्दे खराब कर सकती है। मूत्राशय में बचा पेशाब दबाव बनाकर गुर्दों तक पहुँचता है। गुर्दे फूलते हैं और कमजोर होते जाते हैं। कोई दर्द नहीं होता। क्रिएटिनिन और अल्ट्रासाउंड एक दिन में यह बता देते हैं।
- प्रोस्टेट बढ़ने और कैंसर के लक्षण एक जैसे हैं। ये दो अलग बीमारियाँ हैं और एक दूसरी नहीं बनती। पर दोनों एक ही उम्र में होती हैं और दोनों PSA बढ़ाती हैं। इसीलिए PSA जाँचा जाता है — ताकि बढ़ता स्तर छूट न जाए।
लक्षण
दो तरह के होते हैं। कौन से ज्यादा हैं, उसी से इलाज तय होता है।
- रुकावट वाले — धार कमजोर या धीमी, शुरू होने में देर, जोर लगाना, बीच में रुक जाना, अंत में टपकना, और पूरा खाली न लगना।
- मूत्राशय की बेचैनी — बार-बार जाना, अचानक तेज हाजत, और रात में उठना। रोजमर्रा की जिंदगी इन्हीं से सबसे ज्यादा बिगड़ती है।
| IPSS अंक | गंभीरता | आमतौर पर |
|---|---|---|
| 0–7 | हल्के | पानी का समय बदलें और निगरानी। दवा कम ही चाहिए |
| 8–19 | मध्यम | यहीं से दवा शुरू होती है |
| 20–35 | गंभीर | दवा दी जाती है; ऑपरेशन की संभावना ज्यादा |
यह अंक सिर्फ लक्षण नापता है। आपको कितनी तकलीफ है, यह भी उतना ही मायने रखता है।
कौन सी जाँच
- यूरिन जाँच — इन्फेक्शन में भी यही लक्षण होते हैं, इसलिए पहले उसे हटाते हैं।
- यूरोफ्लोमेट्री — मशीन में पेशाब करने से धार की गति नापी जाती है।
- बचा हुआ पेशाब — पेशाब के तुरंत बाद अल्ट्रासाउंड।
- अल्ट्रासाउंड KUB — प्रोस्टेट का आकार, मूत्राशय की पथरी, और गुर्दों की सूजन।
- क्रिएटिनिन — गुर्दे की ताकत।
- PSA — उम्र और प्रोस्टेट के आकार के साथ मिलाकर देखा जाता है।
- ब्लड शुगर — बिना पता चली शुगर अक्सर बार-बार पेशाब के रूप में दिखती है।
ब्लैडर डायरी डाउनलोड करें → दो-तीन दिन की डायरी रात में उठने की वजह किसी भी स्कैन से बेहतर बताती है।
इलाज
- आसान उपाय — पानी दिन में जल्दी पिएँ, शाम को कम। शाम की चाय, कॉफी और शराब घटाएँ। कब्ज ठीक कराएँ। पेशाब के बाद कुछ सेकंड रुककर दोबारा कोशिश करें।
- अल्फा-ब्लॉकर (टैम्सुलोसिन, साइलोडोसिन) — मूत्राशय की गर्दन ढीली करते हैं। कुछ ही दिनों में धार सुधरती है। प्रोस्टेट छोटा नहीं करते। खड़े होने पर चक्कर और वीर्य कम होना हो सकता है। मोतियाबिंद के ऑपरेशन से पहले आँख के डॉक्टर को बताएँ।
- फिनास्टेराइड / ड्यूटास्टेराइड — छह से बारह महीनों में प्रोस्टेट को सचमुच छोटा करते हैं। बड़े प्रोस्टेट में बेहतर। ये PSA को आधा कर देते हैं, इसलिए बाद की रिपोर्ट उसी हिसाब से पढ़ी जाती है।
- दोनों साथ — बड़े प्रोस्टेट और ज्यादा तकलीफ में।
- TURP — मानक ऑपरेशन। पेशाब के रास्ते से दूरबीन जाती है और रुकावट वाला हिस्सा निकाल देती है। शरीर पर कोई चीरा नहीं। एक-दो रात अस्पताल, एक-दो दिन में कैथेटर बाहर, दो से चार हफ्ते में सामान्य दिनचर्या। लगभग 80 ग्राम तक के प्रोस्टेट में।
- HoLEP या लेजर — बड़े प्रोस्टेट में, जहाँ ज्यादा हिस्सा निकालना हो।
- पेशाब एक से ज्यादा बार बंद हो, या कैथेटर निकालने पर न आए।
- गुर्दे की ताकत घट जाए, या गुर्दे फूल जाएँ।
- मूत्राशय में पथरी बने, या इन्फेक्शन बार-बार लौटे।
- प्रोस्टेट से बार-बार खून आए।
धार की गति, बचा हुआ पेशाब और क्रिएटिनिन बता देते हैं कि दवा अब भी काम कर रही है या नहीं।
क्या साथ लाएँ
- प्रोस्टेट के आकार या बचे पेशाब वाली कोई भी अल्ट्रासाउंड रिपोर्ट।
- पुरानी PSA रिपोर्ट, तारीख के साथ — एक अंक से ज्यादा उसका बदलाव मायने रखता है।
- हाल की क्रिएटिनिन, शुगर और यूरिन रिपोर्ट।
- ब्लैडर डायरी, अगर भर पाए हों।
- सभी दवाएँ। पेशाब बढ़ाने वाली और सर्दी की कुछ दवाएँ इसे बिगाड़ती हैं।
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