सत्तर की उम्र तक लगभग हर पुरुष का प्रोस्टेट कुछ न कुछ बढ़ा होता है, और कई को उससे तकलीफ भी होती है। इसलिए असली सवाल यह नहीं कि प्रोस्टेट बढ़ा है या नहीं। आमतौर पर बढ़ा ही होता है। सवाल यह है कि वह इतना नुकसान कर रहा है या नहीं कि इलाज जरूरी हो, और अगर हाँ तो कौन सा।
आकार असली बात नहीं
बड़ा प्रोस्टेट हमेशा बड़ी दिक्कत नहीं देता। गलत जगह बैठा 30 ग्राम का प्रोस्टेट बाहर की ओर बढ़े 90 ग्राम से ज्यादा रोक सकता है। मायने यह रखता है कि धार कितनी रुकी है, और उसका मूत्राशय व गुर्दों पर क्या असर है।
इलाज तीन सवालों से तय होता है।
- आपको कितनी तकलीफ है? IPSS अंक से, और जीवन की गुणवत्ता वाले एक सवाल से। वह आखिरी सवाल अक्सर अंक से ज्यादा मायने रखता है।
- मूत्राशय खाली हो रहा है? धार की गति और बचे हुए पेशाब से।
- गुर्दों पर असर है? क्रिएटिनिन और अल्ट्रासाउंड से।
लक्षणों का अंक
IPSS पिछले एक महीने के बारे में सात सवाल पूछता है। हर सवाल 0 से 5 अंक का।
| अंक | गंभीरता | आमतौर पर |
|---|---|---|
| 0–7 | हल्के | आदतें और निगरानी। दवा कम ही |
| 8–19 | मध्यम | दवा शुरू की जाती है |
| 20–35 | गंभीर | दवा दी जाती है, ऑपरेशन की संभावना ज्यादा |
यह एक औजार है, अंतिम फैसला नहीं। 9 अंक वाला वह व्यक्ति जो रात में चार बार उठता है, 16 अंक वाले उस व्यक्ति से पहले मदद माँग सकता है जिसे खास फर्क नहीं पड़ता।
कब आदतें ही काफी हैं
हल्के लक्षणों में अक्सर इतना ही काफी होता है। दवा के साथ भी ये करने लायक हैं।
- पानी दिन में जल्दी पिएँ, शाम को कम। इससे रात में उठना कम होता है।
- शाम की चाय, कॉफी और शराब घटाएँ।
- पेशाब बढ़ाने वाली दवा और उसका समय डॉक्टर से पूछें।
- कब्ज का इलाज कराएँ। भरी आँत सचमुच पेशाब करना मुश्किल बनाती है।
- पेशाब के कुछ सेकंड बाद दोबारा कोशिश करें।
- सर्दी और एलर्जी की दवाएँ देख लें। कई पेशाब पूरी तरह रोक सकती हैं।
दवाएँ
- अल्फा-ब्लॉकर — टैम्सुलोसिन, साइलोडोसिन, अल्फुजोसिन। ये मूत्राशय की गर्दन ढीली करते हैं, इसलिए कुछ ही दिनों में धार सुधरती है। प्रोस्टेट छोटा नहीं करते। खड़े होने पर चक्कर और वीर्य कम या न निकलना हो सकता है, जो दवा बंद करने पर ठीक हो जाता है। मोतियाबिंद के ऑपरेशन से पहले आँख के डॉक्टर को जरूर बताएँ।
- फिनास्टेराइड और ड्यूटास्टेराइड — ये ग्रंथि को सचमुच छोटा करते हैं, छह से बारह महीनों में लगभग पाँचवें हिस्से तक। बड़े प्रोस्टेट में बेहतर। पेशाब रुकने और आगे ऑपरेशन की जरूरत का खतरा घटाते हैं। ये PSA को आधा भी कर देते हैं, इसलिए बाद की रिपोर्ट उसी हिसाब से पढ़नी पड़ती है। इनके बावजूद PSA बढ़े तो ध्यान देना जरूरी है। कुछ पुरुषों में इच्छा पर असर पड़ता है।
- दोनों साथ — बड़े प्रोस्टेट और ज्यादा तकलीफ में। बीमारी बढ़ने से रोकने में बेहतर, पर दोनों के दुष्प्रभाव साथ आते हैं।
- मूत्राशय शांत करने वाली दवाएँ — रुकावट का इलाज होने के बाद भी तेज हाजत रहे तो जोड़ी जाती हैं। बचे हुए पेशाब पर नजर रखते हुए।
- रोजाना टडालाफिल — जहाँ स्तंभन की समस्या भी साथ हो।
- अल्फा-ब्लॉकर कुछ दिनों में काम करते हैं। छह हफ्ते में फायदा न हो तो वह दवा जवाब नहीं है।
- फिनास्टेराइड और ड्यूटास्टेराइड को परखने में तीन से छह महीने लगते हैं।
- दवा लक्षण काबू करती है। बढ़ाव को ठीक नहीं करती, और आमतौर पर लंबे समय चलती है।
- पूरी दवा के बावजूद लक्षण बढ़ते जाएँ तो दोबारा जाँच का समय है — एक और दवा जोड़ने का नहीं।
प्रोस्टेट बदलता रहता है। धार की गति, बचा हुआ पेशाब और क्रिएटिनिन बता देते हैं कि दवा अब भी काम कर रही है या नहीं।
ऑपरेशन कब विकल्प नहीं रहता
ज्यादातर पुरुषों के लिए ऑपरेशन जीवन की सुविधा का फैसला है। इन स्थितियों में नहीं — यहाँ इंतजार का खतरा गुर्दों या मूत्राशय पर पड़ता है।
- पेशाब एक से ज्यादा बार बंद हो, या कैथेटर निकालने पर न आए।
- गुर्दे की ताकत घट जाए, या गुर्दे फूल जाएँ।
- मूत्राशय पूरा खाली न होने से पथरी बन जाए।
- यूरिन इन्फेक्शन बार-बार लौटे।
- प्रोस्टेट से ऐसा खून आए जो दवा से न रुके।
इनके अलावा, ऑपरेशन तब सुझाया जाता है जब पूरी दवा पर भी तकलीफ बनी रहे, या दुष्प्रभाव सहने लायक न हों।
ऑपरेशन
- TURP — दशकों पुराना मानक। दूरबीन पेशाब की नली से जाती है और रुकावट वाला हिस्सा निकाल देती है। शरीर पर कोई चीरा नहीं। एक-दो रात, एक-दो दिन में कैथेटर बाहर, दो से चार हफ्ते में सामान्य दिनचर्या। लगभग 80 ग्राम तक के प्रोस्टेट में।
- बाइपोलर TURP — वही ऑपरेशन, सुरक्षित तरल के साथ, जिससे ज्यादा समय तक काम किया जा सकता है।
- HoLEP और इसी तरह के — लेजर से पूरा रुकावट वाला हिस्सा निकालना। बड़े प्रोस्टेट के लिए, जहाँ TURP में बहुत समय लगेगा।
- खुला या दूरबीन से प्रोस्टेटेक्टॉमी — बहुत बड़े प्रोस्टेट में, या जब साथ में मूत्राशय की पथरी भी निकालनी हो।
ऑपरेशन के बाद
- वीर्य उल्टा मूत्राशय में जाता है — TURP या HoLEP के बाद ज्यादातर पुरुषों में। इससे स्तंभन या अनुभूति पर असर नहीं पड़ता, पर संतान की संभावना पर पड़ता है। जरूरत हो तो पहले बात कर लें।
- पेशाब में खून कुछ हफ्ते आना सामान्य है। दसवें से चौदहवें दिन के आसपास पपड़ी छूटने पर थोड़ा बढ़ता है। पानी बढ़ाएँ, जोर न लगाएँ, और ज्यादा हो तो फोन करें।
- जलन और तेज हाजत कुछ हफ्तों तक रह सकती है, जब तक भीतर की सतह भर न जाए। ऑपरेशन के बाद निराशा का सबसे आम कारण यही है, और यह गुजर जाता है।
- तेज हाजत पूरी तरह न भी जाए। सालों तक रुकावट के खिलाफ काम करता रहा मूत्राशय, रुकावट हटने पर भी हमेशा शांत नहीं होता। ऑपरेशन रास्ता खोलता है, पीछे के सालों का बदलाव नहीं — इसीलिए बहुत देर नहीं करनी चाहिए।
- लगभग चार हफ्ते भारी वजन न उठाएँ।
लंबी नजर से
प्रोस्टेट का बढ़ना आगे बढ़ता रहता है। आकार, PSA, लक्षण और बचा हुआ पेशाब — इन सबसे अंदाजा लगता है कि किसे आगे और इलाज चाहिए होगा। किसी एक फैसले से ज्यादा जरूरी है नियमित जाँच। जो आज गोली पर आराम से है, उसे भी समय-समय पर धार, बचा पेशाब और क्रिएटिनिन जँचवाते रहना चाहिए — क्योंकि रुकावट लक्षण साफ होने से बहुत पहले चुपचाप बढ़ सकती है।
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