- पेशाब में खून की जाँच हमेशा जरूरी है — एक बार भी आए, बिना दर्द के आए, या अपने आप बंद हो जाए।
- ज्यादातर वजहें कैंसर नहीं होतीं। पथरी, इन्फेक्शन और बढ़ा प्रोस्टेट सबसे आम कारण हैं।
- जाँच में CT स्कैन और दूरबीन से मूत्राशय देखना शामिल है। अकेला स्कैन छोटी गाँठ छोड़ सकता है।
खून के थक्के आ रहे हों और धार रुक रही हो। बुखार के साथ कमर में दर्द हो। चक्कर या साँस फूलना महसूस हो। या आप खून पतला करने वाली दवा पर हों और खून ज्यादा आ रहा हो। यह दवा खून आने की वजह नहीं मानी जाती — वह किसी छिपे कारण को सामने ला सकती है, जिसे ढूँढना जरूरी है।
एक बार आना भी काफी क्यों है
मूत्राशय या गुर्दे की गाँठ से खून रुक-रुक कर आता है। वह अपने आप बंद हो जाता है और पेशाब साफ हो जाता है। यही भरोसा दिला देता है, और इसी वजह से लोग रुक जाते हैं। अगली बार खून महीनों बाद आ सकता है, और तब तक समय निकल चुका होता है।
इसीलिए जाँच एक बार खून आने पर ही की जाती है — दोबारा होने का इंतजार नहीं किया जाता।
आम वजहें
- पथरी — आमतौर पर कमर के दर्द के साथ, पर चुपचाप पड़ी पथरी बिना दर्द के भी खून दे सकती है। पथरी के बारे में →
- इन्फेक्शन — जलन और बार-बार पेशाब के साथ। इलाज के बाद खून पूरी तरह बंद हो जाना चाहिए। न हो तो जाँच आगे बढ़ती है। इन्फेक्शन के बारे में →
- बढ़ा प्रोस्टेट — उस पर फैली नसों से कभी काफी खून आ सकता है। बड़ी उम्र में आम, पर यह वजह तभी मानी जाती है जब बाकी हट जाएँ।
- मूत्राशय की गाँठ — बिना दर्द के, रुक-रुक कर आने वाला खून इसकी पहचान है। धूम्रपान सबसे बड़ा कारण है। रंग, रबर, चमड़ा, पेंट या रसायन के काम से भी खतरा बढ़ता है।
- गुर्दे की गाँठ — आमतौर पर चुपचाप। अक्सर किसी और वजह से कराए स्कैन में मिलती है।
- गुर्दे की बीमारी — साथ में पेशाब में प्रोटीन और बढ़ा रक्तचाप। इसका इलाज ऑपरेशन से नहीं, गुर्दा रोग विशेषज्ञ से होता है। जाँच इसे शुरू में ही अलग कर देती है।
- चोट, हाल में लगी नली, या बहुत भारी कसरत — इनसे कुछ समय के लिए खून आ सकता है।
- चुकंदर और कुछ खाने के रंग पेशाब लाल कर देते हैं।
- रिफैम्पिसिन और कुछ दवाएँ उसे नारंगी या लाल कर देती हैं।
- माहवारी का खून मिल जाना — दूसरे समय का सैंपल इसे साफ कर देता है।
- पानी की कमी में पेशाब गाढ़ा दिखता है, पर खून नहीं होता।
यूरिन जाँच इन सबको मिनटों में अलग कर देती है। यह जाँच टालने का नहीं, करा लेने का कारण है।
जाँच में क्या होता है
पूरा मूत्र मार्ग देखा जाता है, क्योंकि खून गुर्दे से लेकर पेशाब की नली तक कहीं से आ सकता है।
- यूरिन जाँच और कल्चर — असली खून की पुष्टि और इन्फेक्शन की पहचान। कणों का आकार बताता है कि खून गुर्दे की छन्नी से आ रहा है या रास्ते से।
- यूरिन साइटोलॉजी — पेशाब में बही असामान्य कोशिकाएँ। पॉजिटिव आने पर काम की; सामान्य आने से कुछ खारिज नहीं होता।
- क्रिएटिनिन और पेशाब में प्रोटीन — गुर्दे की बीमारी को सर्जरी वाले कारणों से अलग करते हैं।
- CT यूरोग्राम — मुख्य स्कैन। डाई से गुर्दे और नलियाँ साफ दिखती हैं, और वे गाँठें भी जो अल्ट्रासाउंड में छूट जाती हैं।
- सिस्टोस्कोपी — पतली लचीली दूरबीन से मूत्राशय के अंदर देखना, आमतौर पर OPD में जेल लगाकर। कोई स्कैन छोटी चपटी गाँठ को पक्के तौर पर खारिज नहीं कर सकता। यही जाँच लोग सबसे ज्यादा टालना चाहते हैं, और यही सबसे ज्यादा जवाब देती है।
अपने आप बंद हो जाने वाला खून ही सबसे ज्यादा नजरअंदाज होता है। एक बार हुआ है, तो एक बार जँचवा लें।
किन्हें ज्यादा ध्यान देना चाहिए
जाँच सबके लिए जरूरी है। इनमें और भी:
- उम्र 40 से ऊपर, और हर दशक के साथ ज्यादा।
- धूम्रपान — अभी का या पहले का।
- औद्योगिक रंग, रबर, चमड़ा, पेंट या रसायन का काम।
- आँखों से दिखने वाला खून, न कि सिर्फ जाँच में मिला।
- न दर्द, न जलन, न कोई और लक्षण।
- बिना कारण वजन घटना, या इन्फेक्शन का पूरा इलाज होने के बाद भी खून आना।
क्या साथ लाएँ
- सभी यूरिन रिपोर्ट, खासकर वह पहली जिसमें खून मिला।
- कोई भी अल्ट्रासाउंड या CT फिल्म और रिपोर्ट।
- यह लिखकर लाएँ कि खून कब आया, धार की शुरुआत में या आखिर में, और थक्के थे या नहीं। इससे स्रोत पता करने में मदद मिलती है।
- दवाओं की सूची, खून पतला करने वाली दवा साफ लिखकर।
- धूम्रपान का इतिहास और आपका काम — पुराना काम भी।
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यह पेज केवल सामान्य जानकारी देता है। यह चिकित्सा सलाह, निदान या इलाज का विकल्प नहीं है। अपनी स्थिति के अनुसार जाँच और सलाह के लिए योग्य यूरोलॉजिस्ट से मिलें।
