एक नज़र में
  • जलन और बार-बार पेशाब — आमतौर पर मूत्राशय का इन्फेक्शन। सही दवा के छोटे कोर्स से ठीक हो जाता है।
  • बुखार के साथ कमर में दर्द — इन्फेक्शन गुर्दे तक पहुँच गया है। आज ही इलाज चाहिए।
  • बार-बार इन्फेक्शन की कोई वजह होती है। यूरिन कल्चर और अल्ट्रासाउंड से वह मिल जाती है।
इनमें उसी दिन दिखाएँ

कँपकँपी वाले बुखार के साथ कमर में दर्द का मतलब गुर्दा शामिल है। साथ में पथरी हो तो यह इमरजेंसी है। इन हालात में भी उसी दिन आएँ — उल्टी से दवा अंदर न रुकना, बुजुर्ग का भ्रम में रहना या बहुत नींद आना, पेशाब न आना, या गर्भावस्था — चाहे तकलीफ कम ही लगे।

तीन अलग समस्याएँ

  • मूत्राशय का इन्फेक्शन — जलन, बार-बार पेशाब, तेज हाजत, गंदला या बदबूदार पेशाब, कभी थोड़ा खून। बुखार नहीं। महिलाओं में आम, क्योंकि उनकी नली छोटी होती है।
  • गुर्दे का इन्फेक्शन — कँपकँपी वाला बुखार, कमर में दर्द, उल्टी, बहुत कमजोरी। पेशाब के लक्षण हो भी सकते हैं, नहीं भी। कभी-कभी नस से दवा के लिए भर्ती होना पड़ता है।
  • प्रोस्टेट का इन्फेक्शन (पुरुषों में) — गुदा और अंडकोष के बीच, पेट के निचले हिस्से या स्खलन के समय दर्द, साथ में पेशाब के लक्षण। कोर्स लंबा चाहिए, दो से चार हफ्ते, क्योंकि दवा प्रोस्टेट तक मुश्किल से पहुँचती है।
पुरुष में यह कभी 'सिर्फ इन्फेक्शन' नहीं होता
  • पुरुषों की नली लंबी होती है, इसलिए इन्फेक्शन कम होता है — और उसके पीछे कोई वजह होती है।
  • आम वजहें: बढ़ा प्रोस्टेट, पथरी, नली की सिकुड़न, या शुगर।
  • पुरुष में पुष्ट इन्फेक्शन हो तो कम से कम अल्ट्रासाउंड और बचा हुआ पेशाब जाँचना चाहिए।
  • वजह ढूँढे बिना इलाज करने का मतलब है कुछ महीनों बाद वही इलाज दोबारा।

कौन सी जाँच

  • यूरिन रूटीन — पस सेल, खून, नाइट्राइट।
  • यूरिन कल्चर — सबसे जरूरी। इससे पता चलता है कौन सा कीटाणु है और कौन सी दवा चलेगी। आजकल कई दवाएँ बेअसर हो चुकी हैं, इसलिए बिना कल्चर के बार-बार इलाज करने का मतलब अक्सर ऐसी दवा देना है जो काम ही नहीं कर रही। सैंपल दवा शुरू करने से पहले दें।
  • ब्लड शुगर — शुगर से इन्फेक्शन जल्दी होता है और ज्यादा बिगड़ता है। कई बार शुगर पहली बार ऐसे ही पकड़ में आती है।
  • अल्ट्रासाउंड और बचा हुआ पेशाब — हर पुरुष में, महिलाओं में बार-बार इन्फेक्शन पर, और बुखार वाले हर मरीज में।
  • CT KUB — पथरी का शक हो, या दो-तीन दिन में बुखार न उतरे।
  • सिस्टोस्कोपी — तभी, जब वजह साफ न हो या इन्फेक्शन ठीक होने के बाद भी खून आता रहे।

इलाज

  • मूत्राशय का इन्फेक्शन — छोटा कोर्स, आमतौर पर तीन से पाँच दिन। कल्चर आने पर दवा बदली जा सकती है। साथ में पानी और दर्द के लिए पैरासिटामोल।
  • गुर्दे का इन्फेक्शन — सात से चौदह दिन। उल्टी, तेज बुखार या सुधार न होने पर नस से दवा और भर्ती।
  • प्रोस्टेट का इन्फेक्शन — दो से चार हफ्ते, ऐसी दवा से जो प्रोस्टेट तक पहुँचे। कोर्स बीच में छोड़ना ही इसे पुराना बना देता है।
  • बंद और संक्रमित गुर्दा — पहले स्टेंट या पीठ से नली डालकर निकासी। बंद गुर्दे को सिर्फ दवा से साफ नहीं किया जा सकता। पथरी का इलाज कुछ हफ्ते बाद।
  • असली वजह का इलाज — पथरी निकालना, प्रोस्टेट की रुकावट हटाना, या शुगर काबू करना। यह छोड़ दें तो दवा कितनी भी सही हो, इन्फेक्शन लौटता रहेगा।
इस साल तीसरी बार इन्फेक्शन? असली समस्या इन्फेक्शन नहीं है।

बार-बार लौटने की कोई वजह होती है, जो मिल भी सकती है और ठीक भी हो सकती है। पुरानी कल्चर रिपोर्ट साथ लाएँ।

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दोबारा न हो, इसके लिए

जिन महिलाओं को बार-बार इन्फेक्शन होता है और अल्ट्रासाउंड सामान्य है:

  • इतना पानी पिएँ कि पेशाब दिन भर हल्के रंग का रहे।
  • पेशाब रोककर न रखें। जल्दबाजी के बजाय पूरा खाली करें।
  • अगर इन्फेक्शन संबंध के बाद होता है, तो उसके बाद पेशाब जरूर करें।
  • सफाई आगे से पीछे की ओर करें।
  • कब्ज ठीक कराएँ — इसका हाथ लोगों के अंदाजे से ज्यादा होता है।
  • रजोनिवृत्ति के बाद योनि में लगाने वाले एस्ट्रोजन के बारे में पूछें। सूखापन एक आम और ठीक होने वाली वजह है।

क्या साथ लाएँ

  • सभी पुरानी कल्चर रिपोर्ट — इनका पैटर्न सब कुछ तय करता है।
  • अब तक ली गई दवाएँ, तारीख और कितने दिन के साथ।
  • कोई भी अल्ट्रासाउंड या CT रिपोर्ट।
  • हाल की शुगर और क्रिएटिनिन रिपोर्ट।
  • हो सके तो नई दवा शुरू करने से पहले का ताजा यूरिन सैंपल।

संबंधित: इन्फेक्शन के बाद भी खून आना · पुरुषों में प्रोस्टेट की रुकावट।

डॉ. अज़हर अनवर M.Ch. यूरोलॉजी (DMC लुधियाना) · DNB जनरल सर्जरी · कंसल्टेंट यूरोलॉजिस्ट एवं एंड्रोलॉजिस्ट, वाराणसी

यह पेज केवल सामान्य जानकारी देता है। यह चिकित्सा सलाह, निदान या इलाज का विकल्प नहीं है। अपनी स्थिति के अनुसार जाँच और सलाह के लिए योग्य यूरोलॉजिस्ट से मिलें।