- 5 mm से छोटी पथरी — ज्यादातर पानी और दवा से अपने आप निकल जाती है।
- बड़ी पथरी — ESWL (बाहर से तरंगें), लेजर, या पीठ से दूरबीन (PCNL)। बड़ा चीरा अब बहुत कम लगता है।
- CT की फिल्म साथ लाएँ, सिर्फ रिपोर्ट नहीं।
बुखार के साथ कमर में दर्द का मतलब हो सकता है कि गुर्दा बंद है और उसमें इन्फेक्शन है। ऐसे गुर्दे की कुछ घंटों में निकासी (ड्रेनेज) जरूरी है। सिर्फ एंटीबायोटिक से काम नहीं चलेगा। इन हालात में भी उसी दिन जाएँ — पेशाब बिल्कुल न आना, दवा से दर्द काबू न होना, या उल्टी के कारण पानी भी न रुकना।
लक्षण
गुर्दे में चुपचाप पड़ी पथरी सालों तक कुछ नहीं करती। तकलीफ तब शुरू होती है जब वह खिसककर रास्ता रोक देती है।
- अचानक तेज दर्द — कमर या पसली के नीचे, जो जाँघ की तरफ जाता है। लहरों में आता है। करवट बदलने से कम नहीं होता।
- पेशाब में खून — रंग लाल या गुलाबी दिखे, या सिर्फ जाँच में मिले।
- उल्टी — दर्द के साथ।
- जलन और बार-बार हाजत — जब पथरी मूत्राशय के पास पहुँचती है। इसे अक्सर इन्फेक्शन समझ लिया जाता है।
- कमर में हल्का लगातार दर्द — कभी-कभी बड़ी पथरी का यही एक संकेत होता है।
कौन सी जाँच
- यूरिन जाँच — इन्फेक्शन और खून देखने के लिए।
- अल्ट्रासाउंड KUB — पहली जाँच। कोई विकिरण नहीं। ज्यादातर पथरी और गुर्दे की सूजन दिखा देती है।
- CT KUB — इलाज इसी से तय होता है। पथरी का सही आकार, जगह और सख्ती दिखती है। ऑपरेशन से पहले जरूरी।
- क्रिएटिनिन — गुर्दे की ताकत। किसी भी प्रक्रिया से पहले।
- पथरी की जाँच — निकली हुई पथरी जँचवाना अगली पथरी रोकने का सबसे अच्छा तरीका है।
इलाज के विकल्प
आकार से मोटा अंदाजा लगता है। असली फैसला जगह, सख्ती और गुर्दे की ताकत देखकर होता है।
- 5 mm से छोटी — आमतौर पर अपने आप निकल जाती है।
- 5–15 mm — ESWL, या पेशाब के रास्ते से लेजर।
- गुर्दे में 15–20 mm — RIRS (लचीली दूरबीन से लेजर) बेहतर।
- 20 mm से बड़ी — PCNL, एक ही बार में साफ हो जाती है।
- मूत्राशय की पथरी — दूरबीन से तोड़कर निकाली जाती है।
- दवा और इंतजार — 5 mm से छोटी पथरी में, जब दर्द सहने लायक हो और इन्फेक्शन न हो। एक दवा नली को ढीला करती है ताकि पथरी निकल जाए। खूब पानी पिएँ और दोबारा दिखाएँ। चार से छह हफ्ते में न निकले तो इलाज जरूरी है।
- ESWL — बाहर से भेजी तरंगें पथरी को छोटे टुकड़ों में तोड़ देती हैं, जो पेशाब से निकल जाते हैं। न चीरा, न आमतौर पर बेहोशी। लगभग 15 mm तक की उन पथरियों में जो ज्यादा सख्त न हों। एक से ज्यादा सिटिंग लग सकती है।
- पेशाब के रास्ते से लेजर (URS / RIRS) — एक पतली दूरबीन प्राकृतिक रास्ते से जाती है और लेजर पथरी तोड़ देता है। शरीर पर कोई चीरा नहीं। एक दिन या एक रात। एक से दो हफ्ते के लिए स्टेंट डाला जाता है, जो OPD में निकल जाता है।
- PCNL — लगभग 20 mm से बड़ी पथरी में। पीठ से 1 cm का रास्ता बनाकर गुर्दे तक पहुँचते हैं और पथरी निकाल देते हैं। दो से तीन रात अस्पताल। PCNL में क्या होता है →
- आपात निकासी — बंद गुर्दे में इन्फेक्शन हो तो नली या स्टेंट कुछ घंटों में राहत देता है। पथरी का इलाज कुछ हफ्ते बाद।
रिपोर्ट से ज्यादा CT की तस्वीरें मायने रखती हैं। WhatsApp पर फोटो भेज दें, हम बता देंगे कि क्या करना होगा।
क्या साथ लाएँ
- CT की CD या फिल्म — सिर्फ छपी रिपोर्ट नहीं।
- पुराने अल्ट्रासाउंड या X-ray, अगर हों।
- हाल की यूरिन और क्रिएटिनिन रिपोर्ट।
- निकली हुई पथरी, छोटी डिब्बी में।
- दवाओं की सूची। खून पतला करने वाली दवा की योजना पहले बनानी पड़ती है।
दोबारा पथरी न बने
पथरी लौटती है। कुछ न बदला जाए तो दस में से चार लोगों को पाँच साल में दूसरी पथरी बन जाती है।
- पानी सबसे बड़ा उपाय है। इतना पिएँ कि पेशाब दिन भर हल्के रंग का रहे। गर्मी और धूप के काम में और ज्यादा।
- नमक कम करें। नमक पेशाब में कैल्शियम बढ़ा देता है।
- दूध-दही बंद न करें। खाने के साथ सामान्य कैल्शियम पथरी का खतरा घटाता है। बंद करने से नुकसान होता है।
- नींबू और खट्टे फल क्रिस्टल बनने से रोकते हैं।
पथरी में खानपान की शीट डाउनलोड करें → · पथरी के कारण और प्रकार →
यह पेज केवल सामान्य जानकारी देता है। यह चिकित्सा सलाह, निदान या इलाज का विकल्प नहीं है। अपनी स्थिति के अनुसार जाँच और सलाह के लिए योग्य यूरोलॉजिस्ट से मिलें।
